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ग्रामीण इलाकों में गहरा होगा कोरोना का असर! उबरने में लग सकता है सालों का समय
द इंडियन एक्स्प्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था दो अलग-अलग तरीकों से प्रभावित होगी. पहला, प्राथमिक मंडी स्तर पर सप्लाई चेन में रुकावट आने से इस साल हुई अच्छी पैदावार पर भी असर डाल सकती है. जिससे महंगाई बढ़ने के डर में भी इजाफा होगा. दूसरा, बीते साल ग्रामीण इलाकों में खासा मददगार साबित हुआ मनरेगा प्रोग्राम इस साल सवालों के घेरे में आ सकता है.
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पहली लहर में खाद्य उत्पादन के मंडी से निकलने में कुछ हद तक परेशानी आई थी. इस बार सवाल है कि उत्पादन मंडी तक भी कैसे पहुंचेगा. इसके अलावा बीमारी के मद्देनजर मनरेगा भी असरदार साबित नहीं होगा. साथ ही बीमार परिवारों के गांव से निकाले जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहायता नेटवर्क टूट सकता है, जिसे नई परेशानियां तैयार होंगी. ऐसे में अगर घर में बीमारी प्रवेश करती है, तो प्रभावित परिवार गरीबी रेखा के नीचे आ जाएंगे. परिणामस्वरूप, बीते साल जो ग्रामीण खपत मददगार साबित हुई थी, अब वह इस साल बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रिसर्च डिविजन की एक ईकोव्रैप रिपोर्ट दिखाती है कि बीते मार्च के 36.8 फीसदी की तुलना में ग्रामीण जिलों में मई में नए मामले बढ़कर 48.5 प्रतिशत हो गए हैं. साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि जीएसटी ई-वे बिल, वाहन और उर्वरक की बिक्री में मार्च की तुलना में अप्रैल में गिरावट आई है.
वहीं, फिंच ग्रुप की इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि दूसरी लहर पहले के मुकाबले 'कम तबाही' वाली होगी, क्योंकि कॉर्पोरेट्स ने पहले से 'बेहतर तैयारी' की है. हालांकि, कंपनी ने आशंका जताई है कि कुछ सेक्टर्स के उबरने की अवधि 2021-22 से भी आगे जा सकती है. इनमें खासतौर से वो सेक्टर्स शामिल हैं, जो सर्विस और सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े हुए हैं.
