इजराइल-हमास का खूनी संघर्ष ले चुका है भयानक रूप, नेतन्याहू ने कहा-'ये तो शुरुआत है'
साल 2014 के बाद सबसे बड़ा संघर्ष
इजराइल-हमास के बीच 2014 के बाद से ये सबसे बड़ी लड़ाई है और इसके खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिखे हैं. गजा के चरमपंथियों ने देर रात तक रॉकेट दागे, जिससे घनी आबादी वाले तेल अवीव इलाके में विस्फोटों की आवाज सुनाई देती रही. इजराइल और हमास के बीच यह लड़ाई 2014 की गर्मियों में 50 दिन तक चले युद्ध से ज्यादा भयंकर है. यरुशलम में धार्मिक तनाव से पैदा हुई यह हिंसा कहां तक जाएगी, ये सोचकर वैश्विक समाज भी चिंतित है. संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व एशिया के शांति दल के राजनयिक टॉर वेन्नेसलैंड ने ट्वीट किया है कि तत्काल फायरिंग रुके क्योंकि हम पूरी तरह से एक युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं. सभी पक्षों के नेताओं को तनाव खत्म करने और संघर्ष को रोकने के लिए जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि गजा में हो रहा युद्ध बर्बादी है और इसकी कीमत मासूम लोगों को चुकानी पड़ रही है.
इजराइली पीएम ने कहा - ये बस शुरुआत हैहमास के हमले में इजराइल के कुछ नागरिकों की भी जान गई है. इसके बाद पीएम बेन्यामिन नेतन्याहू ने हमले और तेज करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने टीवी पर दिए गए एक संबोधन में कहा है कि हमास को इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी और ये महज शुरुआत है. उन्होंने कहा है कि आतंकी संगठनों का इजराइल को नुकसान पहुंचाने का फैसला बेहद गलत था और इसके लिए उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी. इसके बाद ही इलाके में शांति स्थापित होगी. इजराइल के लोड शहर में आपातकाल की भी घोषणा की गई है.
किस विवाद के चलते हुई हिंसा?
इज़राइली सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहे एक केस की 10 मई को सुनवाई होनी थी, जिसमें ये फैसला लिया जाना है कि दमिश्क गेट के करीब शेख़ जर्राह इलाके से फिलिस्तीनी परिवार और उनके घरों को हटाकर, वहां इज़राइलियों को बसाया जाए या नहीं. सुनवाई की तारीख करीब आने के साथ ही फिलिस्तीनी और वामपंथी इज़राइलियों ने प्रदर्शन करने शुरू किए. बेदखली की धमकी के चलते ही दोनों देशों के बीच मामला और बिगड़ा, जिसका नतीजा ये हिंसा रही. शेख़ जर्राह में यहूदियों के प्राचीन उच्च पुजारी शिमोन द जस्ट का गुंबद भी है, जिसके दर्शन के लिए यहूदी लगातार यहां आते रहते हैं और इस वजह से फिलीस्तिनियों से उनकी भिड़ंत के बाद तनाव बढ़ता है. हालांकि निचली अदालत ने इस केस के लिए कहा था कि 1948 युद्ध से पहले यह विवादित ज़मीन पूर्वी यरुशलम की थी.
दुनिया परेशान, इजराइल पीछे हटने को राजी नहीं
संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हरम अल शरीफ में हो रही हिंसा को लेकर हम चिंतित हैं. इसके साथ ही शेख जरह और सिलवान में लोगों को निकाले जाने की घटना पर चिंता जाहिर करते हुए भारत की ओर से कहा गया है कि दोनों ही पक्ष ज़मीनी यथास्थिति को बनाए रखें. भारत के अलावा भी विश्व के कई देशों ने हिंसा पर चिंता जताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है. इसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने भी शांति की अपील करते हुए कहा है कि हिंसा सिर्फ हिंसा को जन्म दे सकती है.
