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इसराइल-ग़ज़ा हिंसा: सहमे बच्चे और जान बचाने के लिए छिपते लोग

 

इसराइल-ग़ज़ा हिंसा: सहमे बच्चे और जान बचाने के लिए छिपते लोग

इसराइली हवाई हमलों में मारे गए लोगों के जनाज़ों में कई लोग शिरकत कर रहे हैं

इसराइल और गज़ा में रहने वाले आम नागरिकों का कहना है कि ग़ज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी चरमपंथियों और इसराइली सेना के बीच जारी गोलीबारी के बीच वो जान बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

सोमवार रात से अब तक फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने सैंकड़ों रॉकेट दाग़े हैं. वहीं इसराइल ने भी इसके उत्तर में ग़ज़ा पट्टी में कई ठिकानों को निशाना बना कर हमला किया है.

बीते कुछ सालों में हुई हिंसा के सबसे बुरे इस दौर में दोनों तरफ़ कई लोगों की जानें गई हैं जबकि कई घायल हुए हैं.

बीबीसी ने यहाँ रहने वालों से बात कर उनके डर और आशंकाओं के बारे में जानने की कोशिश की.


'हमारी आशंका है कि लड़ाई लंबी चलने वाली है'

योलांडे नैल,

यरुशलम से, मध्यपूर्व मामलों की संवाददाता

इसराइल के दक्षिण में बसे शहर अश्कलोन में ग़ज़ा पट्टी की तरफ से दाग़े गए ताज़ा रॉकेट हमलों के कारण बड़ा नुक़सान हुआ है.

हमास के विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि वो इस इलाक़े में रहने वालों की जिंदगी "नर्क" कर देंगे और यहाँ रहने वाले लोग इससे डरे हुए हैं.

यहाँ बीच-बीच में रुक-रुक कर सायरन की आवाज़ आती रहती है और लोग छिपने के लिए जगह तलाशते नज़र आते हैं.

यहाँ से नज़दीक ग़ज़ा पट्टी से छोड़े जाने वाले अधिकतर रॉकेट को इसराइल अपने डोम मिसाइल डिफेन्स सिस्टम के ज़रिए इन्टरसेप्ट कर सकता है (ये सिस्टम बीच आसमान में मिसाइल या रॉकेट की पहचान कर उसे रोकता है).

इसके बाद सिर के ऊपर का आसमान धमाकों की ज़ोरदार आवाज़ से गूँज उठता है और आसमान में सफ़ेद धुंए की एक लकीर-सी बन जाती है.

हालाँकि इसके बाद भी कई रॉकेट सीधे इमारतों पर आकर गिरे हैं. इन हमलों में दो महिलाओं की मौत हुई है जबकि दर्जनों लोगों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

हाल के सालों में इसराइल में बनने वाली इमारतों में बम हमले से छिपने के लिए उचित व्यवस्था करना नियम बन गया है, लेकिन कई पुरानी इमारतें हैं, जिनमें इस तरह की व्यवस्था नहीं है.

गज़ा में बनी इमारतों पर इसराइली हमले

एक महिला ने बताया कि तड़के एक मिसाइल आकर उनके घर पर गिरा और वो डर के मारे आलमारी में छिप गईं.

कई लोगों का कहना है कि वो मानते हैं कि ये गोलीबारी अभी कई दिनों तक चलेगी, वो इसके मद्देनज़र अपने लिए व्यवस्था करने में लगे हुए हैं.

यूसी आसुलिन नाम के एक व्यक्ति कहते हैं, "हिंसा का दौर लंबा चलेगा. अब कई लोगों की जान जा चुकी है और अब यहाँ लोग चाहते हैं कि हमेशा के लिए (हमास के साथ) इस समस्या को सुलझा लिया जाए."


'सब कुछ इतनी जल्दी हो गया'

इसराइल के लोड शहर में हुए एक रॉकेट हमले में 52 साल के एक इसराइली अरब व्यक्ति और 16 साल की उनकी बेटी की मौत हो गई. ये रॉकेट उनकी कार पर आकर गिरा था. हमले में उनकी पत्नी घायल हो गई हैं.

लोड शहर में फ़िलहाल आपातकाल लागू है.

इस परिवार के एक रिश्तेदार अहमद इसमाइल ने कैन टेलीविज़न को बताया, "मैं अपने घर पर था, हमने रॉकेट की आवाज़ सुनी. ये सब कुछ बहुत जल्दी हो गया. यहाँ हमलों से छिपने के लिए सेफ़ रूम नहीं है."

पूरी रात हवाई हमलों के सायरन शहर में गूँजते रहे और हज़ारों लोगों को जान बचाने के लिए बम शेल्टर में सोना पड़ा.

यरुशलम पोस्ट में बतौर डिफेन्स और सिक्योरिटी संवाददाता काम कर रही ऐना ऐरॉनहीम ने पाँच महीने के अपनी बच्ची के साथ ऐसे ही एक बम शेल्टर में रात गुज़ारी.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "रॉकेट इंटरसेप्ट किए जा रहे थे, उसकी तेज़ आवाज़ हम सुन सकते थे. ये बेहद डरावना था. साथ ही हमारे नज़दीक रॉकेट के गिरने की आवाज़ें भी डरा रही थीं."

अश्कलोन शहर में रहने वाली एक महिला चैनल 11 टेलीविज़न को बताया, "हमारे बच्चे कोरोना वायरस से तो बच गए लेकिन ये बड़ी त्रासदी अब उनके सामने है."

'हमारे आसपास सब जल चुका था'

ग़ज़ा में गिरे हुए इमारतों के मलबे से अभी भी धुंआ निकल रहा है और सड़कों पर मलबा बिखरा पड़ा है. फ़लस्तीनी, फिलहाल रात को हुई गोलीबारी से नुक़सान का आकलन कर रहे हैं.

उत्तरी गज़ा में एक परिवार के पाँच सदस्यों की मौत इसराइली रॉकेट हमले में हो गई. मरने वालों में दो बच्चे शामिल हैं जो हमले के वक्त बोरियों में घास भर रहे थे.

मारे गए बच्चों के कज़न, 14 साल के इब्राहिम उनकी मौत के बारे में बताते हुए रो पड़े. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "हम लोग हँस खेल रहे थे, मज़े कर रहे थे और फिर अचानक से हमारे ऊपर बम आकर गिरा. हमारे आसपास सब कुछ जलने लगा."

एक और रॉकेट एक कार पर आकर गिरा जिसमें तीन लोग थे, तीनों की मौत हो गई.

गज़ा में रहने वाले 54 साल के आबिद अल्दया कहते हैं, "मैं क्या कहूँ? ये गुनाह है."

वो कहते हैं, "वो लोग आम नागरिक, एक महिला थी, एक बच्चा था, एक नाई और एक दुकान के मालिक थे. जब रॉकेट गिरा ये लोग हादसे की जगह पर मौजूद थे. उन्होंने किसी विद्रोही या किसी अधिकारी पर हमला नहीं किया. हम आम नागरिक हैं जो अपने घरों में सो रहे थे."

आबिद अल्दया

'ऐसा लगता है कि तनाव बढ़ रहा है'

रुश्दी अबू अलूफ

गज़ा शहर से, बीबीसी न्यूज़ संवाददाता

बीते कई सालों से गज़ा में इस तरह हालात नहीं देखे गए थे. ये भीड़भाड़ वाला शहर है जिसे अच्छे से पता है कि इसके लिए युद्ध के क्या मायने हो सकते हैं.

शहर के केंद्र में मौजूद मुख्य कमर्शियल सड़क पूरी तरह से ख़ाली हैं, वहाँ केवल इक्का-दुक्का लोग ही दिख रहे हैं.

मुसलमानों का बेहद महत्वपूर्ण त्योहार ईद आने वाली है और इससे पहले यहाँ लगभग सभी दुकानें बंद हैं.

मंगलवार सवेरे को भी इस इलाक़े में लगातार फ़लस्तीनी रॉकेट और इसराइली हवाई हमलों की आवाज़ गूँजती रही.

गज़ा में हमारे दफ्तर से कुछ मीटर की दूरी पर तेज़ धमाके की आवाज़ के साथ एक रिहाइशी इमारत पर इसराइल की तरफ से दाग़ा गया एक रॉकेट गिरा. इमारत से काले धुंए का ग़ुबार उठ रहा था. इस इमारत में सैंकड़ों लोग रहते थे.

इस हमले में इमारत में छिपे इस्लामी जिहाद के दो सैन्य नेताओं की मौत हुई.

गज़ा में हुए हमलों में कई इमारतें ध्वस्त हुई हैं

हमले के बाद एक महिला अपनी गोद में एक छोटे बच्चे को लेकर इमारत से चीखती हुई बाहर की तरफ भाग रही थी.

उन्होंने कहा, "ये इसराइली आतंकवाद है, हम मासूम नागरिक हैं. मेरे बच्चे डरे हुए हैं और उन्हें लगता है कि फिर से हमला हो जाएगा. अब वो वापस घर नहीं जाना चाहते."

दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू होने के बाद अब लोग हमलों से बचने के लिए अपने घरों की तरफ जा रहे हैं.

गज़ा के घरों में बम हमलों से बचने के लिए सेफ़ रूम जैसी व्यवस्था नहीं है और न ही यहाँ सायरन जैसी व्यवस्था है. इसलिए लोगों के पास घरों में छिपने के अलावा कोई और चारा नहीं है.

एक स्थानीय निवासी शेरिन एमादादीन कहती हैं, "हमें नहीं पता कि गोलीबारी का ये दौर कितना लंबा चलने वाला है. ऐसा लग रहा है कि तनाव बढ़ रहा है और ये जल्दी ख़त्म नहीं होगा."

वो कहती हैं, "मैं चार बच्चों की माँ हूँ. हम सात मंज़िल की एक इमारत में रहते हैं जिसमें कोई बेसमेन्ट नहीं है. मुझे नहीं पता कि अगर बम हमारी इमारत पर आकर गिरा तो हम जान बचाने के लिए कहाँ छिपेंगे."

शेरिन फ़ोन पर जब मुझसे बात कर रही थीं उस वक्त वो पश्चिमी गज़ा में खुली एकमात्र दुकान से अपने परिवार के लिए खाने का सामान ला रही थीं.

वो कहती हैं, "अगर स्थितियाँ ठीक होतीं तो मैं अभी रमजान के महीने के ख़त्म होने पर चॉकलेट और मिठाइयाँ ख़रीद रही होती. लेकिन हमें नहीं पता कि ये लड़ाई और कितने दिन चलने वाली है इसलिए मैंने केवल ज़रूरी सामान ही ख़रीदा है."

(,

source: bbc.com/hindi

Publisher: BBC Hindi

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